
अखण्ड भारत कब कब विभाजन हुआ
पिछले 2500 वर्षा से भारत का विभाजन होता रहा है सन् 1947 के पहले हमारे देश के 23 विभाजन हो चुके है 1947 का विभाजन 24 वां विभाजन था सन् 1857 से 1947 अर्थात 90 वर्षा के भीतर ही अंग्रेजो दारा भारत के 7 विभाजन किये गये
1857को भारत वर्ष का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किलोमीटर था ओर वर्तमान भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किलोमीटर है भारत से अलग हुए नौ पड़ोस देशो ( अफगानिस्तान म्यांमार श्रीलंका बमा नेपाल तिब्बत भूटान पाकिस्तान बांग्लादेश ) का क्षेत्रफल 5 लाख वर्ग किलोमीटर है अंग्रेजो 1947 तक 7 टुकडे भारत के अलग कर दिए थे सन् 1947 मे पाकिस्तान को भारत से अलग किय बाद मे 1971 मे पाकिस्तान से बांग्लादेश अलग हुआ
हमारे देश को 14 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को आधी-अधूरी आजादी मिली जो विभाजन हमारे देश के तत्कालीन नेताओ ने स्वीकार किया उसके परिणाम स्वरूप हमारे 62 जिले हम से पराये हो गये हमारी पवित्र नदियो झेलम रावी सिंधु चिनाब परायी होगयी हमारे भागवान रामलला के बेटे लव का लाहौर कुश का कुसूर ननकाना साहेब ओर हमारे पवित्र शक्ति पीठ माता हिंगलाज देवी व माता ढाकेशवरी हमसे लिए गये यह परिस्थितियां क्यो बनी इसका एक मात्र कारण है मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति मुस्लिमनों खुश करने के लिए उस समय के नेताओ ने यह बंटवारा यह सोचकर किया था कि शेष बचे हुए भारत मे हम शांति से रहगे लेकिन आज फिर भारत एक ओर विभाजन की कगार पर खड़ा हो गया आजादी के बाद से ही कश्मीर घाटी से हिन्दुओ का पलायन जारी है लेकिन यह पलायन कश्मीर ही नही भारत के अन्य प्रांतो मे भी शुरू हो गया आज स्वतंत्र भारत में कश्मीर के बाद जम्मू क पूंछराजौरी किशतवाड डोडा रामबन भद्रवाह पंजाब के मलेरकोटला राजस्थान के मेवात हरियाणा का मेवात व छछरौली दिल्ली के सीलमपुर ओखला वेलकम सीमापुरी पुरानी दिल्ली भी इस समस्या से प्रभावित है उ प्र का कैराना कांधला शाहकला गंगोह सम्भल आदि के नाम तो सामने आही चुके है पूरे उत्तर प्रदेश के 60 से अधिक कस्बे या गाँव मेरठ सहारनपुर जैसे अनेक शहरो की पचासों कालोनियो ऐसी है जहा हिन्दू समाज को अपने धर्म बहन बिटियो की रक्षा के लिए अपनी जन्मभूमि को छोड़ने का अपमान जनक झेलना पडा है कैराना जैसी घटनाएं देश के कई भागो में हो चुकी हैं
अतः अब सभी हिन्दुओ से आग्रह है उठो ओर अपने देश के प्रांत जो भारत देश से अलग हो गए है उन्हें पुनः भारत मे सम्मिलित करने हेतु सम्पूर्ण समाज को जागृत कर के भारतवर्ष को अखण्ड राष्ट बनने हेतु 14 अगस्त को अखण्ड भारत दिवस पर संकल्प ले कि
में सूरज प्रताप पुनः सभी प्रान्तों को भारत मे सम्मिलित करने हेतु पूरे तन-मन-धन से अग्रसित रहूंगा
भारत माता की जय